पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित श्री राम बहादुर राय के विचार में आपातकाल लगाने का फैसला लोकतंत्र को नहीं, इंदिरा गांधी की सत्ता को बचाने के लिए हुआ था

आपातकाल से पहले बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का श्रीगणेश करने वाले श्री राम बहादुर राय ने कहा है कि इंदिरा गांधी ने जय प्रकाश नारायण के सेना को सरकार का आदेश न मानने की सलाह वाले बयान के कारण नहीं, बल्कि इंदिरा गांधी ने अपनी प्रधानमंत्री पद की कुर्सी बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोंपा था।

वह प्रज्ञा प्रवाह और जिज्ञासा की ओर से राष्ट्रीय कला केंद्र में वरिष्ठ पत्रकार अजय सेतिया की नवीनतम पुस्तक ” आपातकाल : आंदोलन और विश्वासघात की अंतर्कथा” के विमोचन और आपातकाल के सबक विषय पर चर्चा में बोल रहे थे। कार्यक्रम में आपातकाल के खिलाफ संघर्ष करने वाले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय के अलावा श्री के. एन गोविंदाचार्य और श्री राज कुमार भाटिया मुख्य वक्ता थे ।

यहां उल्लेखनीय यह है पुस्तक लेखक अजय सेतिया और और तीनों अन्य वक्ता भी आपातकाल के दौरान में जेल में रहे थे। पुस्तक लेखक अजय सेतिया ने कहा कि सिद्धार्थ शंकर रे ने शाह आयोग के सामने कबूल किया था कि आपातकाल का फैसला जय प्रकाश नारायण के भाषण से पहले लिया जा चुका था।उन्होंने अपनी पुस्तक के हवाले सेब्ताया कि इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति के सामने झूठ बोला था, राष्ट्रपति इतने दब्बू निकले कि इंदिरा गांधी का एपीएस आरके धवन रात ग्यारह बजे उनसे प्रधानमंत्री आवास में टाईप किए गए आपातकाल के आदेश पर दस्तखत करवा लाया था।

उन्होंने बताया कि पुस्तक में आपातकाल के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के सत्याग्रह और भूमिगत आंदोलन पर विस्तार से चर्चा की गई है, जबकि अब तक प्रकाशित अन्य पुस्तकों में इन दोनों संगठनों की अनदेखी की गई थी।

किताब में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले अनेक व्यक्तियों की भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया है। सेतिया ने कहा कि इस पुस्तक में कई ऐसे दस्तावेज और तथ्य शामिल किए गए हैं, जो पहले व्यापक रूप से सामने नहीं आए थे।इनमें बाला साहब देवरस के वे पत्र भी हैं, जिन पर समाजवादी और कम्युनिस्ट हर साल बिना आधार का बावेला मचाते हैं|

डॉ. राजकुमार भाटिया ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे नई पीढ़ी तक तथ्यात्मक रूप में पहुंचाना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इतिहास से सीख लेना समय की आवश्यकता है।